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महाराष्ट्र की रत्नागिरी : प्राकृतिक सुकून का अनुभव करें, जानिए पूरी डिटेल्स

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शहरी भागदौड़ से दूर, रत्नागिरी, महाराष्ट्र में प्राकृतिक सुकून का अनुभव करें, फरवरी से मार्च तक बेस्ट टाइम, जानिए विस्तार से।

Ratnagiri

Maharastra के रत्नागिरी का प्रसिद्धीकरण केवल आम और मछली के उत्पादन के लिए ही नहीं है, बल्कि यहां की प्राकृतिक सुंदरता भी बहुत खूबसूरत है। विभिन्न औषधीय पौधों, समुद्र तट, और हरियाली से घिरी रत्नागिरी शहर शहरी भीड़भाड़ से दूर सुकून भरा वातावरण प्रदान करता है। कोंकण क्षेत्र में स्थित रत्नागिरी का मौसम अधिकांश महीनों में सुहावना रहता है, जो इसे पर्यटकों के लिए आकर्षक स्थल बनाता है। विभिन्न प्राकृतिक सौंदर्य और आकर्षणों के साथ-साथ, रत्नागिरी नेचर लवर्स के लिए समुद्री जीवन, जंगल ट्रेकिंग, जंगल सफारी, और जलवायु यात्राएँ का भी आनंद लेने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है। इसके अलावा, पांडवों के अज्ञातवास के दौरान लोगो की मान्यता के अनुसार रत्नागिरी उनका ठहराव भी था, जो इसे इतिहास प्रेमियों के लिए भी रुचिकर बनाता है। रत्नागिरी की यात्रा के लिए रेल, सड़क, और हवाई मार्ग उपलब्ध हैं, जो सहज यात्रा के विकल्प प्रदान करते हैं।

Ratnagiri

रत्नागिरी में घूमने लायक जगहें

गणपतिपुले

रत्नागिरी, महाराष्ट्र में भगवान गणपतिपुले का स्वयंभू मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है। इसका निर्माण लगभग 400 साल पहले हुआ था। यहां की भव्य मूर्ति को लगभग 600 साल पहले केवड़े के वन में खोदा गया था, जो इस मंदिर के निर्माण का कारण बना। रत्नागिरी के इस मंदिर को ‘पश्चिम देवर देवता’ के नाम से भी जाना जाता है, और यह भारत के अष्टगणपति मंदिरों में से एक है। बताया जाता है कि इस मंदिर की परिक्रमा करने से व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होता है। गणपतिपुले के मंदिर के आसपास वातावरण भी बहुत ही प्राकृतिक और शांतिपूर्ण है, जो पर्यटकों को आकर्षित करता है।

आरे-वारे बीच

आरे-वारे जुड़वां समुद्र तट हैं। एक तरफ आरे है, जिसका मतलब है आइए आपका स्वागत है, बीच में पुल है और दूसरी तरफ वारे, जिसका मतलब हम आप पर वारे जाएं। समुद्र तट पर मिलती है काली रेत, विविध रंगों के पेड़, और साफ पानी, जो इसे अत्यंत आकर्षक बनाते हैं। यहां के पानी में अपना चेहरा भी देखा जा सकता है, जो इस जगह की खूबसूरती को और भी बढ़ाता है।

रत्नदुर्ग किला

यह ऐतिहासिक दुर्ग शिवाजी का प्रमुख किला है, जिसे भगवती किला भी कहा जाता है, क्योंकि इसके अंदर भगवती का मंदिर स्थित है। इस किले का क्षेत्रफल 120 एकड़ से भी अधिक है और यह बहमनी साम्राज्य के काल में निर्मित हुआ था। 1670 में, शिवाजी महाराज ने इसे बीजापुर के आदिल शाह से जीता था। इस किले से आरब सागर और रत्नागिरी बंदरगाह को निगरानी में रखा जा सकता है।

यहां घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का महीना बेस्ट होता है। 

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