राजधानी दिल्ली में आज से छात्रों के लिए एक नई सुविधा की शुरुआत हो गई है। दिल्ली सरकार ने 25 यूनिवर्सिटी स्पेशल बसें चलाई हैं, जो विद्यार्थियों को सुरक्षित, भरोसेमंद और समर्पित कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएंगी। इन नई बसों को खासतौर पर छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। ये बसें दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस, साउथ कैंपस, जेएनयू, आईआईटी दिल्ली समेत अन्य प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों को सीधे जोड़ेंगी।
बसों का शेड्यूल कॉलेज की टाइमिंग्स के अनुसार तय किया गया है, ताकि छात्रों को समय पर क्लास और लाइब्रेरी पहुंचने में किसी तरह की परेशानी न हो। परिवहन विभाग का कहना है कि इन बसों के जरिए छात्रों को सुरक्षित यात्रा का भरोसा तो मिलेगा ही, साथ ही ट्रैफिक और प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी। छात्र संगठनों और अभिभावकों ने इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि इससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर छात्रों का भरोसा और मजबूत होगा।
शेड्यूल भी कॉलेजों की समयावधि के हिसाब से तैयार किया गया है। पहले जो डीटीसी बसें चलती थीं, उनको भी कॉलेज के समयानुसार ही चलाया जाता था। 1971 में यू- स्पेशल बस सेवा की शुरुआत हुई थी। 1990 का दशक आते-आते 400 बसें राजधानी की सड़कों पर चलने लगीं थीं। 2009 के बाद धीरे-धीरे कमी आती गई। 2020 में बिल्कुल बंद हो गईं। बाद में स्वयं की गाड़ियों के चलन, मेट्रो की शुरुआत के बाद बस सेवा धीमी होती गई। सड़कों से बसें गायब होने लगीं। कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में बस सेवा पूरी तरह से बंद हो गई। अब पांच साल बाद फिर इसे शुरू किया गया है।
युवाओं को सार्वजनिक बसों से जोड़ने की कवायद
डीटीसी का उद्देश्य है कि छात्र निजी वाहनों पर निर्भर रहने के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। इससे न सिर्फ सड़कों पर भीड़ कम होगी बल्कि पर्यावरण की सुरक्षा में भी योगदान मिलेगा। यू-स्पेशल सेवा को छात्र-अनुकूल, टिकाऊ और आधुनिक परिवहन प्रणाली की ओर एक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों की स्थिति
राजधानी दिल्ली आज देश का अग्रणी शहर है जहां सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। 2025 के मध्य तक कुल 2,949 इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। इनमें से 2,210 बसें डीटीसी के पास और 739 बसें क्लस्टर योजना के तहत संचालित हैं। यह प्रदूषण-मुक्त बसें सरकार की स्वच्छ और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन के प्रति गंभीरता को दर्शाती हैं।