भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का श्रीलंका में शनिवार को भव्य स्वागत किया गया। जैसे ही पीएम मोदी श्रीलंका की राजधानी कोलंबो पहुंचे, वहां के राष्ट्रपति और अन्य उच्च अधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पारंपरिक परिधान में सजे सांस्कृतिक दलों ने सांस्कृतिक नृत्य और संगीत के माध्यम से अतिथि का अभिनंदन किया। इसके बाद पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और उन्हें 21 तोपों की सलामी के साथ विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
यह दौरा दोनों देशों के बीच गहराते संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। पीएम मोदी का यह श्रीलंका का तीसरा आधिकारिक दौरा है, और इस बार यह विशेष रूप से रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
संभावित समझौते
पीएम मोदी के इस दौरे के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
- ऊर्जा सहयोग: दोनों देश अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं पर चर्चा कर रहे हैं, खासकर सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा में निवेश को लेकर समझौते की उम्मीद है।
- संवहन और बंदरगाह विकास: कोलंबो पोर्ट और त्रिंकोमाली बंदरगाह के विकास में भारत की भागीदारी को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बन सकती है। यह क्षेत्रीय व्यापार और नौवहन सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।
- डिजिटल कनेक्टिविटी: डिजिटल पेमेंट सिस्टम, फिनटेक सहयोग, और स्टार्टअप्स के बीच साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं लागू हो सकती हैं।
- शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान: दोनों देशों के युवाओं के लिए छात्रवृत्ति, संस्कृति आधारित आदान-प्रदान कार्यक्रम, और ऐतिहासिक स्थलों के संयुक्त संरक्षण पर सहमति संभव है।
रणनीतिक महत्व
श्रीलंका हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का एक अहम पड़ोसी है और चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत-श्रीलंका के बीच मजबूत संबंधों की आवश्यकता है। पीएम मोदी के इस दौरे को भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का हिस्सा माना जा रहा है। यह दौरा क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है। पीएम मोदी की 2019 के बाद यह पहली श्रीलंका यात्रा है। इससे पहले वे 2015 और 2019 में श्रीलंका का दौरा कर चुके हैं। पीएम मोदी की इस यात्रा से भारत-श्रीलंका के संबंधों में और अधिक मजबूती आने की उम्मीद है।
रक्षा समझौते से 35 साल पुराना कड़वा अध्यया होगा खत्म
रक्षा सहयोग पर समझौता होने से भारत-श्रीलंका रक्षा संबंधों में एक बड़ी प्रगति होगी। यह 35 साल पहले द्वीप राष्ट्र से भारतीय शांति सेना (आईपीकेएफ) को वापस बुलाने से संबंधित कड़वे अध्याय को पीछे छोड़ देगी। प्रधानमंत्री की श्रीलंका यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब द्वीप राष्ट्र आर्थिक तनाव से उबरने के संकेत दे रहा है। दो साल पहले देश बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा था और भारत ने 4.5 अरब अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता दी थी।