अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में आज रुपया अपने शुरुआती नुकसान से उबरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे के उछाल के साथ 85.30 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। ऐसा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा करीब 60 देशों पर जवाबी शुल्क लगाने के बाद विश्व की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर के कमजोर होने के कारण हुआ। शुरुआती कारोबार में घरेलू मुद्रा को झटका लगा, लेकिन जल्द ही इसने अपनी खोई जमीन फिर हासिल कर ली और दिन के अंत में यह सकारात्मक रुख के साथ बंद हुआ।
मुंबई के वित्तीय बाजारों में आज एक अप्रत्याशित घटना घटी। भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले महत्वपूर्ण उछाल दर्ज किया, जिससे निवेशकों और अर्थशास्त्रियों के बीच हलचल मच गई। रुपये में 22 पैसे की वृद्धि दर्ज की गई, और यह 85.30 के स्तर पर पहुंच गया।
बाजार में उत्साह
इस उछाल ने बाजार में उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है। निवेशकों में आशा की एक नई किरण दिखाई दी, और उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था में अपना विश्वास व्यक्त किया। शेयर बाजार में तेजी देखी गई, और विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों में अधिक निवेश करना शुरू कर दिया।
विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रुपये में यह उछाल कई कारकों का परिणाम है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की सख्त मौद्रिक नीति, विदेशी निवेशकों का बढ़ता विश्वास और वैश्विक बाजार में डॉलर की कमजोरी, ये सभी रुपये की मजबूती में योगदान दे रहे हैं।
आम आदमी पर प्रभाव
रुपये की मजबूती का आम आदमी पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। आयातित वस्तुओं की कीमतें कम हो जाएंगी, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। इसके अलावा, विदेशी यात्रा और शिक्षा भी सस्ती हो जाएगी।