भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस के बीच 2024 के बांग्लादेशी विद्रोह के बाद पहली बार द्विपक्षीय वार्ता हुई। यह ऐतिहासिक मुलाकात दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह वार्ता दिल्ली में हुई, जहां प्रधानमंत्री यूनुस ने भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा के तहत प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आपसी विश्वास बहाली, सीमा पार सुरक्षा, व्यापार और जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा, “भारत और बांग्लादेश केवल पड़ोसी नहीं, बल्कि साझा सांस्कृतिक विरासत के भागीदार हैं। हम बांग्लादेश की स्थिरता और लोकतंत्र को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
प्रधानमंत्री यूनुस, जो कि 2024 के विद्रोह के बाद एक नई राजनीतिक व्यवस्था के तहत सत्ता में आए हैं, ने भी रिश्तों को मजबूत करने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने कहा, “हम बांग्लादेश में शांति और लोकतंत्र को स्थापित करने के लिए भारत के सहयोग के आभारी हैं। भविष्य में हम एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करते हुए सहयोग बढ़ाएंगे।”
बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा सुरक्षा, तस्करी पर नियंत्रण, और तीस्ता जल समझौते को पुनर्जीवित करने पर भी चर्चा की। इसके अलावा एक संयुक्त आर्थिक आयोग के गठन और रेलवे व कनेक्टिविटी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों के संबंधों में आई दरार को पाटने का प्रयास है और इसका असर क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ेगा। 2024 की शुरुआत में बांग्लादेश में हुई व्यापक जनविद्रोह और सत्ता परिवर्तन के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव आ गया था। भारत ने शुरू में स्थिति पर सतर्क रुख अपनाया था, लेकिन अब दोनों पक्ष पुनः संबंध सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।