आरती डोगरा (IAS) की जीवन कहानी प्रेरणा, साहस और आत्मविश्वास की मिसाल है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो कोई भी बाधा हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचने से नहीं रोक सकती। आइए जानते हैं आरती डोगरा की संघर्षपूर्ण लेकिन प्रेरणादायक जीवन यात्रा की कैसे उन्होंने कड़ी मेहनत कर समाज को दिया मुहतोड़ जवाब
प्रारंभिक जीवन और संघर्ष
आरती डोगरा का जन्म 1980 में देहरादून, उत्तराखंड में हुआ था। वह एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता स्वतंत्र डोगरा इंडियन आर्मी में कर्नल थे और माँ कुमुद डोगरा एक स्कूल प्रिंसिपल थीं। जन्म से ही आरती को एक बौद्धिक और शारीरिक चुनौती का सामना करना पड़ा — वह बौनी कद की (dwarfism) थीं। उनका कद लगभग 3.5 फीट है।
बचपन में ही समाज के तानों और लोगों की आलोचनाओं से उन्हें जूझना पड़ा। स्कूल में बच्चों द्वारा उनका मजाक उड़ाया जाता था, लेकिन उनके माता-पिता ने कभी हार नहीं मानी और उन्हें सामान्य बच्चों की तरह ही पाला-पोसा। उनकी माँ ने हमेशा आरती को आत्मविश्वास सिखाया।
शिक्षा और आईएएस बनने का सफर
आरती ने देहरादून के वेल्हम गर्ल्स स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR) से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई में वह हमेशा अव्वल रहीं। फिर उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) से मास्टर्स किया।
आईएएस बनने की प्रेरणा उन्हें राजस्थान कैडर के आईएएस मनोज पारीक से मिली, जो उनके मेंटर बने। आरती ने बिना कोचिंग के UPSC की तैयारी की और 2006 में पहली बार में ही परीक्षा पास की। वह एक बौनी कद की महिला के रूप में पहली IAS अधिकारी बनीं।
प्रशासनिक सेवा में योगदान
आरती को राजस्थान कैडर मिला। उन्होंने बीकानेर, अजमेर, बूंदी, और जयपुर जैसे जिलों में सेवा दी। वह कई महत्वपूर्ण पदों पर रहीं जैसे:
- बीकानेर की जिला कलेक्टर
- अजमेर की ADM
- मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष अधिकारी
उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा सुधार, बाल विवाह विरोध अभियान आदि में सराहनीय कार्य किया। उनका “बूंदी मॉडल” स्वच्छता के क्षेत्र में देशभर में प्रसिद्ध हुआ।
सम्मान और पहचान
- आरती डोगरा को कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में प्रेरणास्रोत बताया है।
- उन्हें कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कार मिल चुके हैं।
- उनकी कार्यशैली, ईमानदारी और संवेदनशीलता उन्हें जनता का प्रिय बनाती है।
आरती ने कभी अपने शारीरिक आकार को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने अपने आत्मविश्वास, ईमानदारी और सेवा भावना से समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाई। वह आज भी सादगी से जीती हैं और अपने काम में पूरी लगन से जुटी रहती हैं। आरती डोगरा उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो किसी न किसी वजह से खुद को कमजोर समझते हैं। उनकी कहानी सिखाती है।